ट्रैफिक नियमों का पालन कराने और हादसों को रोकने के लिए परिवहन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है.
देहरादून: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं परिवहन विभाग और पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी चुनौंती बनी हुई है. जिसके चलते विभागों की ओर से वाहनों का चालान और वाहनों को सीज करने की कार्रवाई को बढ़ा दी गई है, ताकि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करें. इसके साथ ही, परिवहन विभाग की ओर से बॉर्डर क्षेत्रों के साथ ही शहर भर में लगाए गए एएनपीआर कैमरे के जरिए नियमों का पालन न करने वाले लोगों का ई-चालान किया जा रहा है.
विभागों की ओर से ऑफलाइन किए जा रहे चालान के बाद अधिकतर लोग चालान भर रहे हैं, लेकिन ई-चालान होने के बाद अधिकांश लोग चालान का जुर्माना नहीं भर रहे हैं. जो परिवहन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौंती बनी हुई है. ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के ई-चालान करना आसान है, लेकिन उनकी रकम वसूलना परिवहन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौंती बनती जा रही है. ऐसी स्थिति सिर्फ उत्तराखंड में नहीं है बल्कि देशभर में ई चालान की वसूली लंबित है.
देहरादून में 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति की अध्यक्षता में बैठक हुई थी. जिस बैठक में रोड सेफ्टी को लेकर तमाम महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा किया गया था. इसके साथ ही ई- चालान वसूलने को लेकर भी समिति के अध्यक्ष ने तमाम निर्देश दिए है. मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी निर्देश के आधार पर कार्रवाई किए जाने को लेकर चर्चा की गई है. जिसके तहत, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का नवीनीकरण और डुप्लीकेट आरसी जारी करने पर रोक लगाने के साथ ही वाहन स्वामी का पता बदलने और ऑनरशिप ट्रांसफर करने पर रोक पर विचार चल रहा है.
-सनत कुमार सिंह,अपर परिवहन आयुक्त-
ऐसे में इन चालानों की वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हालही में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. ताकि ई चालान के लंबित चालानी शुल्क को जमा करवाया जा सकें. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने बकाया होने पर वाहन से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं रोकी जाने, जांच में चालान न चुकाने पर वाहन जब्त करने जैसे सुझाव दिए हैं. हालांकि, देहरादून में हालही में सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक हुई थी. जिसमें ई चालान वसूलने को लेकर चर्चा किया गया था.
ई-चालान बकाया पर इन सेवाओं को रोकने पर जोर
- रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) का नवीनीकरण और डुप्लीकेट आरसी जारी करने पर रोक
- वाहन स्वामी का पता बदलने और ऑनरशिप ट्रांसफर करने पर रोक
- फिटनेस सर्टिफिकेट और पॉल्यूशन प्रमाणपत्र जारी न करना
- वाहन को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करना
- कई उल्लंघन के मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के रीन्यू पर रोक
- रैंडम जांच में बकाया ई-चालान मिलने पर वाहन को जब्त करने की पहल
सुप्रीम कोर्ट की ओर से 28 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ई-चालानों के मद में करीब 49,194 करोड़ रुपये वसूले जाने थे. इनमें से करीब 26,175 करोड़ रुपये ही वसूल हुए है. यानी करीब 23,019 करोड़ रुपये की रकम बाकी है.
अदालत ने कहा कि केवल बड़ी संख्या में चालान जारी करना महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि जुर्माने की वसूली भी करनी उतनी ही जरूरी है. ऐसी ही कुछ स्थिति उत्तराखंड की भी है. उत्तराखंड में एएनपीआर के जरिए वर्तमान साल 2026 में अगस्त महीने तक 2,01,015 ई- चालान किए गए है. जिसमें मात्र 37,755 ई- चालान का जुर्माना भरा गया है.
एएनपीआर के तहत चालान की जिलावार स्थिति
- देहरादून जिले में 61,258 चालान हुए है जिसमें से 13477 चालान का जुर्माना भरा गया है
- उधमसिंह नगर जिले में 63,854 चालान हुए है जिसमें से 10,845 चालान का जुर्माना भरा गया है
- हरिद्वार जिले में 42,523 चालान हुए है जिसमें से 4,265 चालान का जुर्माना भरा गया है
- नैनीताल जिले में 22,007 चालान हुए है जिसमें से 5,603 चालान का जुर्माना भरा गया है
- टिहरी जिले में 3846 चालान हुए है जिसमें से 1585 चालान का जुर्माना भरा गया है
- पौड़ी गढ़वाल जिले में 1565 चालान हुए है जिसमें से 549 चालान का जुर्माना भरा गया है
- चंपावत जिले में 5962 चालान हुए है जिसमें से 1431 चालान का जुर्माना भरा गया है
ऐसे में अब उत्तराखंड परिवहन विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और हाल ही में देहरादून में हुए सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष की निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और ई-चालान व्यवस्था लागू करने का भी निर्देश दिया है. जिसमें 28 अक्टूबर 2025 की MoRTH SOP और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A के अनुपालन पर जोर दिया गया है. ऐसे में वाहनों के डुप्लीकेट आरसी, फिटनेस, पॉल्यूशन, वाहन ट्रांसफर और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित प्रतिबंधों पर किए जाने पर विचार किया जा रहा है.


