क्या मान जाएंगे उत्तराखंड भाजपा के बागी, 14 सीटों पर जूझ रही बगावती तेवरों से, अगले कदम पर नजर।

Politics Uttarakhand


विधानसभा की विभिन्न सीटों पर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के विरुद्ध निर्दल के रूप में ताल ठोकने वाले बागियों को लेकर भाजपा ने अभी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है। बागियों को मनाने के लिए पार्टी नेता अभी भी प्रयासों में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार भाजपा ये मानकर चल रही है कि इनमें से अधिकांश पार्टी प्रत्याशियों को समर्थन दे देंगे। यदि बात नहीं बनती है तो बुधवार से बागियों के पार्टी से निष्कासन का सिलसिला शुरू किया जा सकता है।
भाजपा विधानसभा की 14 सीटों पर बगावती तेवरों से जूझ रही है। इन सीटों पर इतने ही बागी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में डटे हुए हैं। यद्यपि इन्हें मनाने के लिए पार्टी ने पिछले चार दिनों से पूरी ताकत झोंकी हुई है। इन प्रयासों में उसे कुछ सफलता भी मिली और डोईवाला, कालाढूंगी, घनसाली व पिरान कलियर सीट पर वह अपने सात कार्यकत्र्ताओं को मनाकर उनकी नाम वापसी कराने में सफल रही। अलबत्ता, 14 सीटों पर उसे कामयाबी नहीं मिल पाई है, लेकिन उसने प्रयास नहीं छोड़े हैं। बागियों से संपर्क का क्रम बना हुआ है।
इस बीच मंगलवार देर शाम को हुई पार्टी के प्रांतीय पदाधिकारियों की बैठक में स्थिति की समीक्षा की गई। सूत्रों के अनुसार ये तय किया गया कि यदि एकाध दिन तक बागी नहीं मानते हैं तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।

इन सीटों पर डटे हैं बागी

विधायक राजकुमार ठुकराल (रुद्रपुर), पूर्व विधायक महावीर रांगड़ (धनोल्टी), टीकाराम मैखुरी (कर्णप्रयाग), धीरेंद्र चौहान (कोटद्वार), वीर सिंह पंवार (धर्मपुर), दिनेश रावत (देहरादून कैंट), दर्शनलाल (घनसाली), जितेंद्र नेगी (डोईवाला), कमलेश भट्ट (चकराता), मनोज कोली (यमुनोत्री), अजय तिवारी (किच्छा), मनोज शाह (भीमताल), पवन चौहान (लालकुंआ), टेकबल्लभ, नितिन शर्मा (रुड़की) शामिल हैं।

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